कुनाल कुमार की बीमारी का ईलाज ना हो पाने का ज़िम्मेदार कौन?

कुनाल कुमार बिहार के अररिया जिला का साहसमल पंचायत का रहने वाला था| वह आठवीं कक्षा में पढ़ता था| उसकी उम्र 14 वर्ष थी| उसकी माता का नाम यशोदा देवी है और पिता का नाम कन्हैया कुमार पासवान है| कन्हैया जी दिहारी मजदूर है और यशोदा देवी घर का काम करती है| इनके परिवार में कुल 7 लोग थे जिसमें से यशोदा देवी का बड़ा बेटा कुनाल था | कुनाल की मृत्यु एक गंभीर बीमारी से हो गई |

आज से एक साल पूर्व कुनाल को उसके बाएँ कांख में मांस का एक गोला दिखाई दिया| उसने अपने परिवार वालों को बताया कि उसके कांख में मांस का गोला बन गया है और यह बढ़ता ही जा रहा है इसे छूने या दबाने पर दर्द का एहसास नहीं होता है | उसके माँ-बाप ने गाँव के दवाई दुकानदारों से दिखाया | दुकानदार ने अपने हिसाब से दवाई दे दिया| दो महीने तक इनकी दवाई खिलाई पर कोई सुधार नहीं हुआ | परिवार वालों ने झाड़-फूंक भी करवाई | इधर मांस का गोला बढ़ता जा रहा था | बेहतर नहीं होने के कारण जिला के एक प्राइवेट डॉक्टर को दिखाया|  उन्होंने बिना कोई इलाज किये पुर्णिया जिला रेफर कर दिया | परिजनों ने कहा एक बार अपने ही जिला के परिचित डॉक्टर को दिखा देना चाहिए| जब अपने जिला के परिचित डॉक्टर को दिखाया तो डॉक्टर ने कहा, ऑपरेशन करना पड़ेगा | ऑपरेशन करवाने के बाद ठीक हो गया | कुछ दिनों बाद फिर उसी जगह मांस तेजी से बढ़ने लगा | डॉक्टर ने मांस का सैम्पल जाँच के लिए झारखंड भेजा और इधर covid-19 के कारण लॉकडाउन लगा दिया गया | जिसके कारण रिपोर्ट आने में काफी देरी हो रही थी | परिवार वाले डॉक्टर पर दवाब बना रहे थे क्योंकि बच्चे की स्थिति बहुत बिगरती जा रही थी | लॉकडाउन के कारण यातायात की सुविधाएँ बंद हो गई थी| पड़ोसी के मोटरसाइकिल से मरीज को अस्पताल ले जाना पड़ता था| फिर डॉक्टर ने ऑनलाइन रिपोर्ट मंगवाई तो पता चला कि इन्हें कैंसर की बीमारी है | फिर डॉक्टर ने पटना आई.जी.आई.एम.एस अस्पताल रेफर कर दिया | इनके घर से पटना की दुरी लगभग 500 किलोमीटर है | अररिया के प्राइवेट अस्पतालों में लगभग 40-45 हजार रुपैये खर्च हुआ|

कुनाल का पिता दिहारी मजदूर है उसका परिवार एक दलित समुदाय से आते  हैं | वह प्रति दिन 200-250 रु मजदूरी पर काम करते हैं | एक तो वैसे ही दिहारी मजदूर को प्रति दिन काम नहीं मिलता है | लॉकडाउन के कारण तो काम बिलकुल ही बंद हो गया और इनके पास आय का दूसरा कोई स्रोत नहीं है | इधर कुनाल का इलाज करवाना था | लॉकडाउन में सबकुछ महंगा हो गया था | यातायात की सुविधा दुगुनी से भी ज्यादा महँगी हो गई थी| फिर भी बच्चे को पटना ले कर गया, तो वहां पर सबसे पहले covid-19 का जांच करवाया| जांच में नेगेटिव पाया गया| पहले दिन जब डॉक्टर ने मरीज को देखा और दवाइयां दीं तो बच्चे की बीमारी में बहुत सुधार नजर आया| जब दूसरी बार पटना गए तो पहले वाले डॉक्टर नहीं थे, उनका तबादला हो गया था| किसी और डॉक्टर ने मरीज को देखा और दवाइयाँ दीं तो मरीज की स्थिति में कोई सुधार नजर नहीं आइ | यहाँ से कुनाल की हालत बिगर रही थी, अब वह खुद से चल भी नहीं पाता था | परिवार वालो ने भर्ती करवाने की बहुत कोशिश की लेकिन मरीज को भर्ती नहीं ली गई | डॉक्टर यही कह रहे थे कि ठीक हो जायेंगे , भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है | कन्हैया जी के घर की आर्थिक स्थिति पहले से ही बहुत कमजोर थी | घर का निजी संसाधन बिक चूका था , घर की मवेशीयां बिक गई | घर के दरवाजे पर तीन-चार छोटे बड़े पेड़ लगाये हुए थे , उसे भी बेचना पड़ा | फिर भी पैसे की पूर्ति नहीं हो पा रही थी तो गाँव के लोगों से इलाज के लिए चंदा इकठ्ठा करना पड़ा , लोगों से कर्ज भी लिया | मरीज को इलाज के लिए सात आठ बार पटना ले जाना पड़ा |

परिजनों ने अनुदान के लिए आवेदन दिए | कुछ दिनों बाद अनुदान की राशि आने पर उन्हें दो बार मुफ्त दवाइयां दी गई | यह अनुदान आई.जी.आई.एम.एस.  अस्पताल द्वारा ही दिया गया था|

कभी कभी डॉक्टर नहीं देखते थे , कम्पाउण्डर ही देख कर दवाइयां दे दिया करते थे | लगभग ढाई महीने पटना में इलाज चला और 8 बार पटना जाना पड़ा | हर बार जब पटना जाते थे तो तीन से चार दिन पटना में रहना परता था | परिवार के लोग जन जागरण शक्ति संगठन से जुड़े हुए हैं जिसका कार्यालय पटना में है इसलिए वे लोग चार दिन कार्यालय में रहते थे | कुनाल की हालत काफी गंभीर थी रात भर सो नहीं पाते थे जिसके कारण रात-रात भर माँ बाप को जगना पड़ता था | डॉक्टर ने किमो चढाने को कहा , दो बार किमो चढ़ाया, 26 नवम्बर 2020 को जब तीसरी बार किमो चढ़ाया जा रहा था तभी कुनाल की मौत हो गई | पटना में इलाज के दौरान लगभग एक लाख रुपैये खर्च हो गया| अस्पताल से शव को लाने के लिए मुफ्त में एम्बुलेंस भी नहीं मिला , एम्बुलेंस को घर तक लाने के लिए कुल 7500 रुपैये देना पड़ा | कन्हैया जी ने 15 हजार रुपैये कर्ज लिया था| जिसका ब्याज तो नहीं लगता है लेकिन कर्ज चुकाने के लिए उनके घर में काम कर रहे हैं| अभी भी उनके ऊपर दस हजार रुपैये कर्ज है|

ये साड़ी जानकारी कुनाल कुमार की माता यशोदा देवी और चाची चिंता देवी से प्राप्त हुई है |

इस रिपोर्ट को yuvania.in पर भी प्रकाशित किया गया है _

https://yuvaniya.in/2021/06/01/case-study-of-child-death-in-arariya-bihar/?fbclid=IwAR2N8JbH6myOIqGi1y7fOdAYu4uWa_blF8Cpv06IeMH1KFSywUa_41RibgY

Computer workshop

Computer workshop is on last week of December 2019. We are very excited because workshop is across new year. Vibhor bhaiya is leading this workshop.
There are many people in the workshop_

1. Mithun2. Munna3. Jaimanti
4. Neeraj5. Phuleshwar6. Doly
7. Krishcham
Interns in workshop

 

सर्दियों में कम्बल वितरण

हमारे यहां जनवरी के महीने में कड़ाके की शर्दी पड़ती है। इस साल 2019 में जन जागरण शक्ति संगठन को लगभग 300 कम्बल चंदा के रूप में एक संस्था से प्राप्त हुआ। संगठन के माध्यम से ऐसे लोगों को कम्बल वितरण किया गया, जिनके पास रोजगार नहीं होता अगर रोजगार होता भी है तो उन्हें उचित मजदूरी नही दिया जाता, जिसके कारण उनका परिवार सर्दियों में गरम कपड़े खरीदने में असमर्थ होते हैं और ठंड का शिकार होते हैं। हम उस संस्था के शुक्रगुजार हैं। संगठन जो चंद से चलता है को मौका दिया,जरूरतमंद लोगों को मदद करने की।

Society of north Bihar

न्याय, समानता और अहिंसक समाज की पैगाम लेकर एक दिन में 60 किलोमीटर की पैदल यात्रा का निश्चय

अररिया जिला के सिकटी ब्लॉक के सैंकड़ों मजदूर-किसान 23 नवंबर को अपने-अपने गाँव से 60 किलोमीटर की दूरी को पैदल चल कर जन जागरण शक्ति संगठन का केंद्र पर पहुंचे| दुसरे दिन जिला में स्थित टाउन हॉल में एक कार्यक्रम रखा गया था|पिछले कई दिनों से देश भर में संविधान सम्मान यात्रा चल रहा था|ये यात्रा NAPM (national alliance of pepoles movement) के बैनर तले आयोजित किया गया था लेकिन अलग-अलग राज्यों के , अलग-अलग जिलों में इस यात्रा का स्वागत  वहां के स्थानीय संगठन के साथी कर रहे थे|अररिया टाउन हॉल में jjss के साथियों ने कार्यक्रम रखी|जिसमें लगभग 4 हजार लोग शामिल हुए|देश में पिछले कुछ सालों से साम्प्रदायिक हिंसा का एक माहौल सा बन गया था| इस यात्रा के माध्यम से लोगों तक ये पैगाम पहुँचाया जा रहा था कि हमारे संविधान में सभी को बराबरी से जीने का अधिकार है|सभी को रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, रोजगार, बिना कर्जे का इलाज मिलनी चाहिए |सबों को एकसमान मौके मिलनी चाहिए|वर्तमान सरकार ने चुनाव के समय कई वादे किये थे-हर साल 2 करोड़ रोजगार दिए जायेंगे|सबों के खाते में 15-15 लाख रुपैये दिए जायेंगे|जिसको उन्होंने पूरा नहीं किया, ऐसे झूठे वादे करने वालों को सत्ता में नहीं देना चाहिए| 

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